odisha me ghumne ki jagah – ओडीशा भारत के पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा एक समृद्ध संस्कृति को ऐतिहासिक राज्य जो अपने प्राचीन मंदिर वास्तु कला प्राकृतिक शानदार और परंपराओं के लिए जाना जाता है पहले इसे ओडिशा के नाम से जाना जाता था लेकिन अब इसे उड़ीसा कहा जाता है अगर आप एक अच्छी जगह घूमने की सोच रहे हैं तो आप उड़ीसा घूमने के लिए जा सकते हैं उड़ीसा को मंदिरों का घर कहा जाता है क्योंकि भुवनेश्वर जिसे मंदिरों का शहर कहा जाता है यह उड़ीसा में और पुरी का मंदिर जहां पर भगवान बिष्णु बलभद्र रूप में है काफी ज्यादा प्रसिद्ध मंदिर है और प्रति वर्ष यहां पर रथ यात्रा निकाली जाती है जिसमें लाखों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं अगर आप उड़ीसा घूमने के लिए जा रहे हैं तो आप हमारे इस आर्टिकल में आखिर तक बने रहें क्योंकि हम हमारे इस आर्टिकल में आपको odisha me ghumne ki jagah से संबंधित सारी जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराएंगे
1. जगन्नाथ पुरी – odisha me ghumne ki jagah
पुरी उड़ीसा का एक बहुत शहर है यह शहर विशेष रूप से भगवान जगन्नाथ के लिए प्रसिद्ध है और यहां पर साल में एक बार रथ यात्रा निकाली जाती है जिसे देखने के लिए दुनिया भर से लोग यहां पर आते हैं इसे जगन्नाथ नगरी भी कहा जाता है जगन्नाथ मंदिर का निर्माण १३ बी शताब्दी में गंग वंश के राजा ने किया था भगवान जगन्नाथ भगवान विष्णु का अवतार है और उनके भाई और बहन सुभद्रा का यह मंदिर है इस मंदिर के गर्भ में केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति है लेकिन मंदिर परिषद में बहुत विशाल और भव्य हैं रथ यात्रा हर साल जून जुलाई में होती है इस समय भगवान को रथ में बिठाकर गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है जहां लाखों भक्त रथ के साथ जाते हैं पूरी का बीच बंगाल की खड़ी के किनारे फैला हुआ समुद्र तट पर बहुत सुंदर और शांत है सूरज उगने और सूरज डूबने के समय यहां का नजारा काफी मनमोहक रहता है अगर आप जगन्नाथ पुरी घूमने के लिए जा रहे हैं तो आपको यह मंदिर जरूर जाना चाहिए
🏖️२. पुरी बीच (Puri Beach) – odisha me ghumne ki jagah
पुरी बीच उड़ीसा के पुरी शहर में बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित है यह सुनहरी रेट वाला एक खूबसूरत चमत्कार है जिसे समुद्र तट भी कहते हैं यहां सुबह सूर्य उदय और शाम को सूर्य अस्त देखना बहुत सुंदर लगता है यह जगन्नाथ मंदिर के पास है इसलिए इसे पवित्र मानते हैं आप यहां टहल सकते हैं ऊंट की सवारी कर सकते हैं और चैट जैसे खेलों का मजा ले सकते हैं समुद्र तट के किनारे छोटे-छोटे स्टॉल हैं जहां हस्तशिल्प और स्थानीय खान जैसे मछली मिलता है नवंबर दिसंबर में पुरी बीच फेस्टिवल होता है जिसमें रेत कला नृत्य और संगीत देखने को मिलता है यहां अक्टूबर से मार्च तक जाना सबसे अच्छा है क्योंकि मौसम ठंडा और अच्छा रहता है पुरी स्टेशन से आप ऑटो टैक्सी से यहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं अगर आप उड़ीसा घूमने के लिए जा रहे हैं तो आपको पूरी बीच घूमने के लिए भी जरूर जाना चाहिए
🛕 3. भुवनेश्वर (Bhubaneswar) – odisha me ghumne ki jagah
भुवनेश्वर उड़ीसा की राजधानी है और मंदिरों का शहर के नाम से भी मशहूर है जो अपनी प्राचीन वास्तुकला धार्मिक और आधुनिकता के मेल के लिए जाना जाता है यह छोटे-छोटे काफी सारे मंदिर हैं इसके अलावा यहां पर आपको काफी बड़े मंदिर भी देखने को मिलते हैं जिनमें लिंगराज मंदिर सबसे बड़ा और प्रसिद्ध मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है इसके अलावा मुक्तेश्वर मंदिर अपनी सुंदर बनावट के लिए जाना जाता है राजा रानी मंदिर प्रेम का मंदिर कहते हैं इसकी मूर्तियां बहुत खास है और भी आपके यहां पर बहुत कुछ देखने के लिए मिल जाएगा जिनमें उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं शामिल है जो जैन धर्म को दर्शाती हैं अगर आप उड़ीसा घूमने के लिए जा रहे हैं तो आपको भुवनेश्वर घूमने के लिए जरूर जाना चाहिए भुवनेश्वर को मंदिर का शहर भी कहा जाता है क्योंकि इस शहर में बहुत सारे मंदिर हैं
4. सिमिलिपाल नेशनल पार्क – odisha me ghumne ki jagah
सिमलीपाल नेशनल पार्क उड़ीसा के मयूरभंज जिले में स्थित भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व है जो अपनी सिमिलिपाल नेशनल पार्क और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है यह 2750 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है इसका नाम सिमुल पेड़ों के नाम से बनाया गया है यहां पर आपको पार्क में ऊंचे पहाड़ और घने जंगल देखने को मिलते हैं यहां आपको बंगाल टाइगर एशियाई हाथी और चार सिंह वाला हिरन देखने को मिलता है 242 पक्षी की जातियां जैसे मोर हिल ईगल यहां आपको देखते हैं 1028 पौधों की प्रजातियां जिसमे 94 प्रकार की अर्किट हैं यहां पर आपको देखने को मिलती हैं पहले यह मयूरभंज के राजाओं का शिकार गृह था 1956 में टाइगर रिजर्व बना और 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर में शामिल हुआ अगर आप उड़ीसा घूमने के लिए जा रहे हैं तो आपको यह जगह घूमने के लिए अभी जरूर जाना चाहिए
5. कोणार्क – odisha me ghumne ki jagah
कोणार्क सूर्य मंदिर पूरी से 45 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा एक ऐतिहासिक शहर है जो अपने सूर्य मंदिर के लिए मशहूर है सूर्य मंदिर 13वीं शताब्दी में राजा नरसिंह देव प्रथम ने बनवाया था यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है मंदिर में 12 बड़े पहिए और सात घोड़े बने हुए हैं इसकी दीवारों पर नृत्य जानवरों और रोजगार की जिंदगी की खूबसूरत तस्वीरें देखने को मिलती हैं इस जगह को विश्ब हेरिटेज साइट का दर्जा मिला है मंदिर कालिंग वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है हर साल दिसंबर में कोणार्क फेस्टिवल मनाया जाता है जहां उड़ीसा और अन्य शास्त्री नृत्य देखने को मिलते हैं यह सूर्य पूजा का महत्वपूर्ण केंद्र है अगर आप उड़ीसा घूमने के लिए जा रहे हैं तो आपको यह जगह घूमने के लिए अभी जरूर जाना चाहिए
उड़ीसा घूमने के लिए कब जाएं – odisha me ghumne ki jagah
अगर आप उड़ीसा घूमने के लिए जा रहे हैं तो आपको अक्टूबर से मार्च के बीच जाना चाहिए क्योंकि इस समय यहां का मौसम ठंडा रहता है और भुवनेश्वर के मंदिर पुरी बीच कोर्णाक सूर्य मंदिर नेशनल पार्क जैसे स्थानों के शहर के लिए अच्छा स्थान अच्छा समय माना जाता है नवंबर फरवरी में चिल्का झील पर आपको प्रवासी पक्षी भी देखने को मिलते हैं रथ यात्रा जून से जुलाई के बीच निकली जाती है लेकिन गर्मी और भीड़ ज्यादा रहती है इस समय मानसून के दौरान यहां पर आपको चारों तरफ हरियाली देखने को मिलती है आप अपनी आवश्यकता अनुसार घूमने के लिए उड़ीसा जा सकते हैं साल के 12 महीने या मौसम ठीक-ठाक देखने को मिलता है
निष्कर्ष – odisha me ghumne ki jagah
दोस्तों हमने हमारे इस आर्टिकल में आपको उड़ीसा के बारे में बताया उड़ीसा कैसा राज्य उड़ीसा घूमने के लिए हम कब जाना चाहिए और उड़ीसा में घूमने के लिए कौन-कौन सी जगह है अगर आपको हमारे द्वारा लिखा गया आर्टिकल अच्छा लगता है और इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको समझ आ गया है कि हम उड़ीसा घूमने के लिए कब जा सकते हैं तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया आर्टिकल odisha me ghumne ki jagah कैसा लगा धन्यवाद
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